गोस्वामी तुलसीदास विरचित

 

Ramcharitmanas

 

ભાવાત્મક પદ્યાનુવાદ  - શ્રી યોગેશ્વરજી

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बालकांड

   
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Bal Kand

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Another reason for Ram's incarnation

 

(चौपाई)

तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना । कौतुकनिधि कृपाल भगवाना
तहाँ जलंधर रावन भयऊ । रन हति राम परम पद दयऊ ॥ १ ॥
एक जनम कर कारन एहा । जेहि लागि राम धरी नरदेहा ॥
प्रति अवतार कथा प्रभु केरी । सुनु मुनि बरनी कबिन्ह घनेरी ॥ २ ॥
नारद श्राप दीन्ह एक बारा । कलप एक तेहि लगि अवतारा ॥
गिरिजा चकित भई सुनि बानी । नारद बिष्नुभगत पुनि ग्यानि ॥ ३ ॥
कारन कवन श्राप मुनि दीन्हा । का अपराध रमापति कीन्हा ॥
यह प्रसंग मोहि कहहु पुरारी । मुनि मन मोह आचरज भारी ॥ ४ ॥
(दोहा)

बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ ।
जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ ॥ १२४(क) ॥
(सोरठा)

कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु
भव भंजन रघुनाथ भजु तुलसी तजि मान मद ॥ १२४(ख) ॥
 

The story of Naradaji

 

(चौपाई)

हिमगिरि गुहा एक अति पावनि । बह समीप सुरसरी सुहावनि ॥
आश्रम परम पुनीत सुहावा । देखि देवरिषि मन अति भावा ॥ १ ॥
निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा । भयउ रमापति पद अनुरागा ॥
सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी । सहज बिमल मन लागि समाधी ॥ २ ॥
मुनि गति देखि सुरेस डेराना । कामहि बोलि कीन्ह समाना ॥
सहित सहाय जाहु मम हेतू । चकेउ हरषि हियँ जलचरकेतू ॥ ३ ॥
सुनासीर मन महुँ असि त्रासा । चहत देवरिषि मम पुर बासा ॥
जे कामी लोलुप जग माहीं । कुटिल काक इव सबहि डेराहीं ॥ ४ ॥
(दोहा)

सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज ।
छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज ॥ १२५ ॥
 

 
 

 

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