गोस्वामी तुलसीदास विरचित

 

Ramcharitmanas

 

ભાવાત્મક પદ્યાનુવાદ  - શ્રી યોગેશ્વરજી

<< HOME | ADHYATMA | AUDIO | BOOKS | BHAJANS | KAVITAMAHABHARAT | RAMAYAN | SARAL GITA | UPANISHAD | MORE >>

 

बालकांड

   
< BACK

Bal Kand

NEXT >

Naradji comes across Vishwamohini

 

(चौपाई)

बसहिं नगर सुंदर नर नारी । जनु बहु मनसिज रति तनुधारी
तेहिं पुर बसइ सीलनिधि राजा । अगनित हय गय सेन समाजा ॥ १ ॥
सत सुरेस सम बिभव बिलासा । रूप तेज बल नीति निवासा ॥
बिस्वमोहनी तासु कुमारी । श्री बिमोह जिसु रूपु निहारी ॥ २ ॥
सोइ हरिमाया सब गुन खानी । सोभा तासु कि जाइ बखानी ॥
करइ स्वयंबर सो नृपबाला । आए तहँ अगनित महिपाला ॥ ३ ॥
मुनि कौतुकी नगर तेहिं गयऊ । पुरबासिन्ह सब पूछत भयऊ ॥
सुनि सब चरित भूपगृहँ आए । करि पूजा नृप मुनि बैठाए ॥ ४ ॥
(दोहा)

आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि ।
कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि ॥ १३० ॥
 

Vishwamohini fascinates Naradaji at first sight

 

(चौपाई)

देखि रूप मुनि बिरति बिसारी । बड़ी बार लगि रहे निहारी
लच्छन तासु बिलोकि भुलाने । हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने ॥ १ ॥
जो एहि बरइ अमर सोइ होई । समरभूमि तेहि जीत न कोई ॥
सेवहिं सकल चराचर ताही । बरइ सीलनिधि कन्या जाही ॥ २ ॥
लच्छन सब बिचारि उर राखे । कछुक बनाइ भूप सन भाषे ॥
सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं । नारद चले सोच मन माहीं ॥ ३ ॥
करौं जाइ सोइ जतन बिचारी । जेहि प्रकार मोहि बरै कुमारी ॥
जप तप कछु न होइ तेहि काला । हे बिधि मिलइ कवन बिधि बाला॥४॥
(दोहा)

एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल ।
जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल ॥ १३१ ॥
 

 
 

 

| Home | Adhyatma | Shri Yogeshwarji | Maa Sarveshwari | SarvaMangal | Swargarohan |  Site Map | News |

|Audio/video| Books | Contacts | Download | FAQ | Feedback | Glossary | Guest Book | Links | Photo Gallery | Search | What's New? |

Copyright © 2002-2008 by Swargarohan, Danta Road, Ambaji, North Gujarat, INDIA.  All Rights reserved. See Disclaimer